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कविता

*👬 दोस्ती दिवस की शुभकामनायें 👬*

जिसके साथ खून का सम्बन्ध नहीं होता, फिर भी प्रिय लगे..
*वह है👬दोस्त👬*

जिसके साथ दुनियां भर की बातेंa करके भी थकान ना लगे ….
*वह है👬दोस्त👬*

जिसके साथ छोटी सी बात पर भी खुल कर हंस लेते हैं…
*वह है👬दोस्त👬*

जिसके कंधे पर माथा रख कर रो सकते हैं ….
*वह है👬दोस्त👬*

जिसके साथ ठंडी चाय भी एक दम गरम लगे ….
*वह है👬दोस्त👬*

जिसके साथ खिचड़ी भी खाने में दावत जैसी लगे….
*वह है👬दोस्त👬*

जिसको आधी रात को भी उठा कर दिल की बात कर सके….
*वह है👬दोस्त👬*

जिसके साथ बिताए गए पलों को याद करने भर से, चहरे पर मुस्कान आ जाए…….
*वह है👬दोस्त👬*

जिसके साथ कोई भूमिका बनाए बिना खुल कर बात करें और वह स्वीकार करे …..
*वह है👬दोस्त👬*

एक अरसे के बाद भी जिसको मिलते ही दिल झूमउठे….
*वह है👬दोस्त👬*

दूर रहते हुए भी जिसके साथ दिल के तार जुड़े हो…..
*वह है👬दोस्त👬*

दोस्ती वो है मेरे दोस्त जो बेजान जिंदगी में भी जान डाल दे..
*वह है👬दोस्त👬*

*संक्षेप में दोस्त वो है जो हर मुसीबत में हर तरह से साथ निभाये*

*👬 दोस्तों को समर्पित👬*

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शिक्षा

*एक व्यंग हैं ,पसंद आये तो एक स्माइल दीजियेगा* 🙂🙂

*यह नदियों का मुल्क है,*
*पानी भी भरपूर है।*
*बोतल में बिकता है,*
*पन्द्रह रू शुल्क है।*

*यह गरीबों का मुल्क है,*
*जनसंख्या भी भरपूर है।*
*परिवार नियोजन मानते नहीं,*
*जबकि नसबन्दी नि:शुल्क है।*

*यह अजीब मुल्क है,*
*निर्बलों पर हर शुल्क है।*
*अगर आप हों बाहुबली,*
*हर सुविधा नि:शुल्क है।*

*यह अपना ही मुल्क है,*
*कर कुछ सकते नहीं।*
*कह कुछ सकते नहीं,*
*जबकि बोलना नि:शुल्क है।*

*यह शादियों का मुल्क है,*
*दान दहेज भी खूब हैं।*
*शादी करने को पैसा नहीं,*
*जबकि कोर्ट मैरिज नि:शुल्क हैं।*

*यह पर्यटन का मुल्क है,*
*बस/रेलें भी खूब हैं।*
*बिना टिकट पकड़े गए तो,*
*रोटी कपड़ा नि:शुल्क है।*

*यह अजीब मुल्क है,*
*हर जरूरत पर शुल्क है।*
*ढूंढ कर देते हैं लोग,*
*पर सलाह नि:शुल्क है।*

*यह आवाम का मुल्क है,*
*रहकर चुनने का हक है।*
*वोट देने जाते नहीं,*
*जबकि मतदान नि:शुल्क है।*

*बेचारा आदमी:*
*जब सर के बाल न आये तो* *दवाई ढूँढता है..,*
*जब आ जाते है तो नाई ढूँढता है..,*
*और जब काले रहते हैं तो लुगाई ढूँढता है ।*
*जब सफ़ेद हो जाते है तो फिर डाई ढूँढता है…!*

🙏 *मुस्कुराईये क्योकि* *मुस्कुराहट नि:शुल्क है* 🙏 😃😃

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कविता

मोहम्मद रफ़ी

*राग भैरवी आधारित*
*रफ़ी साहब के गाये १५ मोती – ५*

दोस्तों, मोहम्मद रफ़ी साहब के गाये यादगार १५ मोती जैसे गानों की श्रेणी में ये पांचवा प्रोग्राम सुनिये. ये सारे ऐसे गाने है जो राग भैरवी आधरित है. सुनिये की नौशाद और शंकर जयकिशन जैसे दिग्गजों ने भैरवी आधरित कितनी अच्छी धुनें बनाई, और रफ़ी साहब ने क्या गाई है.. उन सब को वंदन..

१. आना है तो आ राह में कोई फेर नहीं है – नया दौर
२. भरी दुनिया में आखिर दिल को बहलाने कहाँ जाये – दो बदन
३. धीरे धीरे चल चाँद गगन में – लव मैरिज
४. गरीब जान के हम को न तुम भुला देना – छूमंतर
५. गरीबों की सुनो, वो तुम्हारी सुनेगा – दस लाख
६. इन्साफ का मंदिर है ये भगवान का घर है – अमर
७. जीत ही लेंगे बाझी हम तुम – शोला और शबनम
८. कैसे समजाऊ बड़े ना समज हो – सूरज
९. मैं चली मैं चली पीछे पीछे जहाँ – प्रोफ़ेसर
१०. मैं जिंदगी में हरदम रोता ही रहा हूँ – बरसात
११. मतवाला जीया डोले पिया – मधर इण्डिया
१२. नाचे मन मोरा मगन तिक धा धीगी धीगी – मेरी सूरत तेरी आँखें
१३. रमैया वस्ता वैया मैंने दिल तुजको दिया – श्री ४२०
१४. तू गंगा की मोज मैं जमुना की धारा – बैजू बावरा
१५. याहू, चाहे कोई मुझे जंगली कहे – जंगली

रफ़ी साहब को सलाम!

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